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Wednesday, December 14, 2011

क्रिसमस उपहार

बच्चे खुश तो सारा जहाँ खुश। ये ही बात सोच कर मैने भी आने वाली क्रिसमस की पूर्व संध्या पर बच्चों को संता क्लाउॅज की तरह उपहार
देकर खुशी बांटने की सोचा और एक दिन पूर्व ही अपनी जमा पूंजी से ढेर सारे खिलौने { कुछ चाबी वाले, स्टार, गुड़ियाएँ, गुल्लक, टाफियाँ, और अन्य उपहार } जिन्हें में बचपन में खूब पसंद करता था खरीद लिये। एक अच्छी सी संता क्लाउॅज की डैªस भी लाकर रख ली और बेसब्री से क्रिसमस की पूर्व संध्या की इंतजारी करने लगा। 24 दिसम्बर की शाम का अंघेरा होते ही खुशी खुशी तैयार होकर उपहार का झोला लेकर बच्चों को खुशियाँ बांटने निकल पड़ा ।
           कुछ ही दूर चला था कि एक सोसाइटी के कम्पाउंड में नई नई डैªसें पहने बच्चे दिख गये । मैं तुरन्त उनके पास पहुँच गया मुझे देखते ही सभी खुश हो गये मुझे लगा जैसे मेरा सपना सच हो गया है। मैने सभी बच्चों को प्यार से दुलार किया और सबसे छोटे बच्चे को सबसे पहले एक चाबी वाला खिलौना निकाल कर दिया । उसने मेरी ओर अचरज से देखा और उस खिलौने में चाबी भर कर जमीन पर चलाया। अभी उसकी चाबी पूरी खत्म भी नही हूई थी कि बच्चे ने उसे उठाते हुए मुझे वापस देकर कहा मुझे ये नही चाहिये मुझे तो कम्प्यूटराइज्ड गेम या रिमोट वाला खिलौना ही चाहिये जिसे दिखा कर मैं अपने स्कूल के साथियों पर रौब जमा सकूं। मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया था क्योकि मैं तो अपने जमाने के खिलौने लाया था अतः मैंे उसकी बात को अनसुना करते हुए तुरन्त बच्चो का घ्यान बाँटने के लिये उन्हें टाफियाँ निकाल कर देने लगा। लेकिन ये क्या ये बच्चे मुझ से टाफियाँ भी नही ले रहे हैं, कारण पुछने पर मालूम चला की इन्हें ये साघारण टाफियाँ पसंद ही नही थी इन्हें तो विदेशी ब्राउन चाकलेट या कॉफी चाकलेट ही पसंद थी।
           मैं बातों में उनको उलछा कर बार बार उन्हें टॉफी देने की कोशिश करने लगा । लेकिन आधुनिक बच्चे अब तक समझ चुके थे और मेरे से दूर जाने लगे। बच्चों के मुझ में कम होते आकर्षण को भांप कर मैं भी वहाँ से निकल कर एक साधारण से चाल में खेल रहे बच्चों के पास आ गया। जहाँ मुझे देखते ही सभी  बच्चे खुशी से चिल्लाने लगे। मेरी दी हुई टाफियाँ सभी बच्चों सभी ने तुरन्त खा ली और उपहारों के झोले को ललचाई निगाहों से देखने लगे , मैने भी बिना देर लगाये सारा झोला ही उनके सामने खोल दिया। सभी उसमें से पसंद करके खिलौने उठाने लगे लेकिन जल्दी ही उनका उत्साह भी ठंडा पड गया, मैने कारण पता किया तो मालूम चला की आजकल बाजार में आकर्षक और सस्ते चीनी खिलौने आ गये हैं इस लिये मेरे लाये पारंपरिक खिलौने इन्हें पसन्द नही आ रहे हैं। एक छोटे बच्चे को जब मैने एक गुड़िया देनी चाही तो उसने बडे़ अनमने भाव से वह गुड़िया ली। मैने उससे पूछ ही लिया कि पसंद नही आई क्या ? तो उसने कूछ सकुचाते हुए कहा कि मुझे तो पिस्तोल, टैंक या स्टेनगन वाला खिलौना चाहिये था। जिससे मैं अपने साथियों को डरा सकूं ।
           मेरे दिल में अब वो उत्साह नही बचा था और मुझे यह बात भी समझ में आ गई थी, की क्यों संता क्लाउॅज रात के अंधेरे में बच्चों को उपहार दे जाते हैं । शायद उन्हें आजकल के हाई प्रोफाइल बच्चों की पसंद मालूम है। मैने भी मन ही मन अगली बार से ऐसे ही मन पसन्द उपहार देने की सोचते हुए घर की ओर प्रस्थान किया।