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Wednesday, December 07, 2011

प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद

प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद के जन्मदिन 3 दिसम्बर को सम्पूर्ण राष्ट्र उनकी 127 वीं जयंती मना रहा है । सौम्य व सदा मुस्कराने वाले डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद अपने त्याग, देष भक्ति, सादगी, दयालु व निर्मल स्वभाव  के लिये जाने जाते हैं एवं उनकी बेदाग राजनीतिक छवि व आदर्षो का उदाहरण आज के राजनीतिज्ञो में इतने वर्षों बाद भी दिया जाता है। डॉ0 साहब ने आजादी के बाद देष की तूफानों से घिरी कष्ती को 12 वर्षो तक बिना जाति, वणर्, वर्ग, धर्म का भेद किये जिम्मेदारी पूर्वक संभाल कर राष्ट्रपति के रूप में बेहतर राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करके जनता में विष्वास बनाया। वे एक लोकप्रिय राजनीतिज्ञ के साथ साथ षिक्षाविद व वकील भी थे। 
          डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 03-12-1884 को बिहार के एक छोटे से गाँव जीरादेई में एक संयुक्त कायस्थ परिवार में हुआ था । पिता श्री महावीर सहाय फारसी व संस्कृत के विद्वान तथा माता श्रीमती कमलेष्वरी देवी धार्मिक महिला थी । एक मौलवी जी से पारसी और सामान्य षिक्षा के बाद छपरा के एक स्कूल में दाखिला लिया, कलकत्ता विष्वविघालय से एम ए तक पढ़ाई करके प्रोफेसर बने। फिर कलकत्ता प्रेसीडेंसी कॉलेज से 1915 में कानून की पढ़ाई में मास्टर डिग्री के लिए विषिष्टता हासिल कर गोल्ड मैडल प्राप्त किया एवं कानून में डॉक्टरेट की उपाघि हासिल करके डॉक्टर कहलाये ।
        युवा अवस्था में उन्होंने समाज सेवा के लिये भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्यता ली। देष में उस समय चल रहे स्वदेषी आंदोलन, असहयोग आंदोलन व चम्पारण आंदोलन से वे गांघी जी के नजदीक आ गये। समर्पित कार्यकर्ता व विलक्षण नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें भारतीय कांग्रेस कमेटी का एक से अघिक बार अघ्यक्ष बनाया गया। 1962 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ” भारत रत्न “ प्रदान किया गया । राजनीति से सन्यास लेने के बाद वे 28-2-1963 को परलोक गमन कर गये ।
            3 दिसम्बर को हमें और विषेष रूप से युवाओं को समाज और देष की एकता के लिये प्रण लेकर उन्हें सच्ची श्रद्वांजली देनी होगी।