बिल्कुल सही कहते हैं लोग🙂
चार दिन गायब होकर देखिए,
सब आपको भूल जाएंगे।
🌹🌹🌹🌹🌷🌷
लेकिन क्या करें🙂☹️
चार दिन साथ चल लें,
स्नेह जकड़ लेता है।
बाहरी व्यक्तित्व तो मात्र,
क्षणिक आकर्षण देता है।
नजदीकियों की गुफ्तगू,
कुछ लगाव बढ़ाती है।
लेकिन,☹️☹️☹️
कुछ संभालो अपने को यारों
जगत भौतिक हो चला है,
दिमाग़ की दिल पर हुकूमत का,
सिलसिला आज आम हो चला है।🌷🌹🌷🌹🌷🌹
मौलिक- डी पी माथुर - अंजय