Search This Blog

Monday, July 08, 2013

जंग


  • कलम हाथ में लिए, 

              कागज पर नैन गड़ाये था । 
       भावनाओं की खोज में दौड़ता मन ,
              कुछ शब्दों को रूप दे पाया था ।
       जाने क्यूं कलम अचानक ठहर गई ,
              मानो घरेलू सियासत रंग चढ़ गई !

  • बदला रूप देख कर उसका,

             मन ने भी सियासत दिखलाई !
       अपने विरोधी बयानो से ,
            कलम की बैचेनी बढ़ाई !
       दो तरफा बयानों के दौर में,
            मन ने की चंचल चतुराई !
       कलम तो मेरी दासी है ,
            इस बयान से की उसकी खिंचाई !

  • इनकी बढ़ती लड़ाई ने ,

             तन की बैचेनी बढ़ाई !
      कोशिश करके भी भावनाएं ,
             रूक नही पाई !
      सुन्दर नयनों ने भी अपनी ,
           अश्रुधारा कागज पर गिराई ,
      शब्द भीगते ही कलम, भावुक हो गई,
           अंगुलियों की पकड़ शिथिल हो गई !

  • जंग से रूक गया जब काम,

               तन ने मुखिया की भूमिका निभाई !
       मन तुम सबसे चपल व तेज हो , 
              हमारी करते हो अगुआई !
       पर कलम के बिना आज तक,
             तुम्हारी बात क्या पुरी हो पाई ?
       सब एक दूजे बिन अधुरे है,
            ये समझा उनमें सुलह कराई !
        तब जाकर यह कविता पूर्ण हो पाई !

Friday, July 05, 2013

मकसद


  •        आपको भावुक कर दूं , 

                             ऐसा मेरा मकसद नही !
             आपसे बढ़ाई के दो बोल सुनु , 
                             ऐसी मेरी फितरत नही !
             कोशिश मात्र इतनी है , 
                         मन के भाव बतला सकूं !
             दिल में छिपा है क्या ,
                         आपको भी दिखला सकूं !!


  •        कलम की रतार दिखला सकूं , 

                       एक क्षण ही सही, 
             आपकी चिंताएं मिटा सकूं !
                     पढ़कर आप मुस्कुराएं ,
             तो पीठ अपनी थपथपा सकूं !!
                   दिल में छिपा है क्या ,   आपको भी दिखला सकूं !!

  •       मन की पीड़ा मिटा सकूं , 

                   कुछ राहत मन को दिला सकूं !
            चारों और खिंच गई , 
                    हर दीवार गिरा सकूं !
            सालों से जमती रही , 
                   मन की गर्त हटा सकूं !!
             दिल में छिपा है क्या , आपको भी दिखला सकूं !!

  •      चाहता हूँ ,मन को अपने,

                  मस्ती में लहरा सकूं !
           विदाई में तुम्हारे , 
                   हाथ मैं भी हिला सकूं ! 
            सीने में क्या छिपा है , 
                   बिना चीरे ही दिखला सकूं !
            दिल में छिपा है क्या , आपको भी दिखला सकूं !!

  •      चाहता हूँ ,

           जीवन में लगी तमाम शर्तो को,  
                    एक ही पल में हटा सकूं !
          फिर से जीने के लिए,  
                   नई बुनियाद बना सकूं !
          अनजाने में बन गई , 
                   हर दूरी मिटा सकूं !
          यादों में तुम्हारी खो, दो बोल गुनगुना सकूं !!
                 कोशिश मात्र इतनी है , 
          दिल में छिपा है क्या , आपको भी दिखला सकूं !!

                     
               पूर्व में ओ बी ओ पर प्रकाशित मेरी रचना ।

Sunday, June 30, 2013

प्रकृति छल

 


  •         सुदूर देव पहाड़ियों में,

                     बादलों ,चट्टानों में जंग नजर आई !
             शांति की तलाश में भटकते इंसा को,
                      सृष्टि एक बार फिर छल पाई !


  •        पार्टियों की पार्टी में ,

                    मच गई कैसी हलचल !
             अनेकों भीगती आँखों के बीच ,
                    कुछ में ग्लिसरीन नजर आई !
             असली हो या नकली ,
                   हर तरफ मायूसी छाई !


  •       आसमां के कहर रूपी नीर की बूंद,

                    धरती के संग-संग हर आँख में समाई ! 
              किसी को प्रियजन की याद ने रूलाया,
                    किन्ही में हमेशा के लिये विरानी छाई !
              हर चेहरा निस्तेज,असहाय नजर आया,
                    रहनूमाओं की असलीयत दिख पाई !

  •        जब जब इंसा ने विज्ञान संग मिल,

                     प्रकृति से जीतने की चाह दिखलाई !
             प्रकृति ने अपने किसी खेल से,
                     इंसा को उसकी सीमा दिखलाई !
             इस बार फिर साँप सीढ़ी के खेल में ,
                    नीर रूपी साँप ने फुफकार लगाई !
             हमें असहाय देख प्रकृति मुस्कुराई ,
                  हमारी कोटी वापस नीचे नजर आई ! 

Monday, June 24, 2013

उत्तराखंड प्राकृतिक आपदा

हमारे देश की देव भूमि उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा ने वहाँ गये तीर्थ यात्रियों के साथ साथ   वहाँ का जनजीवन भी अस्त-व्यस्त कर दिया है,, विषम परिस्थिति की इस घड़ी में हमें अपना धैर्य कायम रखते हुए सच्चा मानव धर्म निभाना है, विभिन्न टी वी चैनलों पर दिखाई गई एवं अखबारों की जानकारी के अनुसार वहाँ लगभग सभी स्थलों और घरों में पानी से साथ आई  मिट्टी व दलदल भरने से खाने पीने की वस्तुएं भी खराब हो गई हैं तथा घर , दुकाने, कारोबार सब उजड़ चुका है हो सकता है उनके परिवारों का भी कोई सदस्य लापता हो । फिर भी वहाँ के गाँव वाले सभी यात्रियों की हर संभव मदद कर रहे हैं । यह जानकर हमें देव भूमि उत्तराखंड के लोगों का धन्यवाद करना चाहिए वो सच में देव भूमि के निवासी हैं !
लेकिन यह जानकर कष्ट हो रहा है कि कुछ असामाजिक तत्व इस वक्त अपने क्षणिक लोभ और लालच में आकर तीर्थ यात्रियों के साथ साथ वहाँ के पीड़ितों को भी लूटने का बेहद आमानवीय कृत्य कर रहे हैं तथा कुछ तथाकथित व्यापारी बन मानवीय-मूल्यों को ताक में रखकर पहले से ही आपदा और प्रकृति की मार झेल रहे भूखे-प्यासे लोगों से रोजमर्या तथा खाने के वाजिब दाम की जगह दस से पचास गुना ज्यादा रूपया वसूल रहे हैं।
इस भयावह प्राकृतिक आपदा में हमारी सेना के जवानों ने यह सिद्व कर दिया है कि उनका मुकाबला इस सम्पूर्ण विश्व में दूसरा नही हो सकता हमारी सरकार और स्थानीय प्रशासन से हमारी यही उम्मीद है कि इस बचाव कार्य की रफतार धीमें ना पड़ने पायें और तीर्थ यात्रियों के साथ साथ   स्थानीय निवासीयों को भी वापस रहने लायक हर संभव सहायता मिले जिससे उन्हे आसानी हो ! देश की जनता को भी सहायता करने का कोई भी मौका और तरीका अच्छा लगे उसी प्रकार सहायता करनी चाहिए क्योंकि हमें यह याद रखना चाहिए कि इस प्रकार की त्रासदी कभी भी किसी जाती धर्म वर्ग या स्थान को देख कर नही आती ! हो सकता है आने वाले समय में हम भी इसी प्रकार भयावह प्राकृतिक आपदा या विषम परिस्थितियों  में फंस जाएँ ! किसी की मदद करने में ही सही मायने में हम अपने मानव-धर्म का पालन कर सकते हैं।
किसी भी रूप में सहायता करने वालों को पुनः धन्यवाद करता हूँ !

Monday, June 17, 2013

पाखण्ड

                 जब से मानव जन्म हुआ,  साथ रहा पाखण्ड !
                 कलयुग हो या अन्य युग , सदा रहा पाखण्ड !
             

  • ज्ञान को अपनी ढाल बनाकर ,  अज्ञानी , लिबास बदलते !

         स्वांग बनाकर तरह तरह के,   कुछ अलग दिख जाते !
         पाखण्ड की आड़ में , अपना व्यापार जमाते !
         असल ज्ञानी तो साधना में ,  लीन ही रह जाते !


  • सेठ साहूकार कर्ज देकर ,  मोटा ब्याज कमाते ! 

         दान के पंखों पर भी ,   वो अपना नाम लिखवाते !
         प्याऊ और बसेरों से वो , इन्कम टैक्स बचाते !
         परोपकार का पाखण्ड कर ,  उससे भी धन कमाते !


  • शिष्य और शोहरत पाने को ,  झूठा प्रचार करवाते !

         पहुँच और पैसों के दम पर ,  जगत में छा जाते !
         ज्ञानियों के साहित्य ग्रंथ पर ,  पाखण्डी मोहर लगाते !
         ज्ञानी को कोई याद ना रखता ,  पाखण्डी पूजे जाते !


  • माँ बाप के जाने पर  ,    जब मोटी वसीयत पाते ! 

         मीड़िया की देखा देखी ,   सफेद लिबास बनवाते !
         बरसी पर फोटो छपवाकर , इतिश्री कर जाते !
         नाम से उनके ट्रस्ट बना ,  पाखण्डी नोट कमाते !

Saturday, May 25, 2013

जीवन लक्ष्य


16 जुलाई 2011 को जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक में छपा मेरा आलेख

जीवन को सार्थक बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारण अति आवश्यक है ।                                                                   


जैसा कि माना जाता है प्रत्येक जीव को मनुष्य जीवन लगभग 33 करोड़ योनियों में जन्म लेने के बाद मिलता है। अतः हमें जीवन को निरर्थकता से उबार कर सार्थक बनाने के लिये अपनी व्यस्ततम जीवनचर्या को और सार्थक बनाने के लिये लक्ष्य निर्धारित कर उसे हासिल करने का प्रयास करना चाहिये । कुछ बिन्दू जिन पर हम अमल कर सकते हैं।

  • जीवन में सर्व प्रथम अपने सामर्थ्य को ध्यान में रखकर अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिये ,     एक से अधिक लक्ष्य होने पर प्राथमिकता तय कर लेनी चाहिये। 
  • लक्ष्य निर्धारित होने पर बिना समय गवाएं पूरी निष्ठा  ओर लगन के साथ उसे प्राप्त करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास  करना चाहिये । 
  • जीवन में प्रत्येक इंसान को सुअवसर जरूर मिलते हैं । ऐसे सुअवसर मिलने पर पूरी क्षमता , लगन, निष्ठा, एकाग्रता से लक्ष्य प्राप्ति के लिए मेहनत करनी चाहिये। 
  • किसी भी कारण से लक्ष्य प्राप्त ना हो तो निराश ना होकर पुनः अपनी गलतियों से सीखते हुए तलाश करने पर नये अवसर जरूर मिलेगें । सदैव आशावादी रहना चाहिये निराशा से लक्ष्य हासिल करना असंभव है।
  • लक्ष्य प्राप्ति के लिए हो सकता है कुछ ऐसे कार्य जो हमें प्रिय लगते हों जैसे टी0वी0 देखना, इधर उधर की बातों में मन लगाना, समय पास करना आदि उन्हें छोड़ने में बिल्कुल देरी नही करनी चाहिये। 
  • अपने भाग्य को ना कोसते हुए कोई कुंठित विचार अपने मन पर हावी नही होने देना चाहिये और यह विचार कि मेरा भाग्य ही खराब है हमारे लक्ष्य निर्धारण मे बाधा पैदा कर सकता है इसलिये कभी भी स्वयं पर दोषारोपण नहीं करना चाहिये । 
  • जैसे जैसे हम लक्ष्य के नजदीक आने लगते हैं वैसे वैसे हमारा जीवन पहले से अधिक रसपूर्ण होने लगता है और हम अपने परिवार व कर्तव्य के प्रति अधिक संतुष्ट, आशावादी, कर्तव्य परायण, समाज सेवी, दृढ निश्चयी होकर  आत्मसम्मान महसूस करते जाते हैं । 



अन्त में  कहना चाहूंगा कि हमारी कल्पनाओं को साकार करना ही हमारे जीवन का मूलमंत्र है अपने को कभी छोटा ना समझते हुए अपनी क्षमताओं को पहचान लेने से  हम सब कुछ कर पाने में सक्षम हो सकते हैं ।  



Wednesday, May 22, 2013

खुशी


Laugh : Illustration of drop with happy expression



  •          कहते हैं , 

                   आंसू मोतियों से कम नही होते ,
                                            बिना दिल की चाहत के,
                  आखों के पुर नम नही होते  !  
                                         कई साल साथ बिताये हैं हमने ,
                  यादें सहेजने और खुशियां बिखरने के लिए ,
                                        ये कम नही होते  !
                 चाहे दुनिया कुछ भी कहे , पर सच ये है कि ,
                                       बांटने से , खुशियों के पल कम नही होते  !